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मातृत्व: Motherhood

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The moment a child is born, the mother is also born. She never existed before. The woman existed, but the mother, never. A mother is something absolutely new.

एक एक टुकड़ा जोड़कर……

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एक एक टुकड़ा जोड़कर कुछ बनाया था नहीं था आसां कठिन फिर भी न होने दिया सपने बुनकर संजोया था बड़े प्यार से जिसे मान लिया हमने अपना 'जहां' हर पल जीवन जीने के लिए क्या पता था टुकड़े-टुकड़े में बिख़र जायेगा ये अपना 'जहां' युहीं छुट जाएगा क्यों कोई सुन्दर सपना भरमा गया मुट्ठी से फिसलती रेत की तरह छुटता चला गया न जाने किस 'जहां' में - कुमार रजनीश

तिरंगे के रंगो में देखा है -एक सपना

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तिरंगे के रंगो में देखा है -एक सपना आने वाला कल होगा, निर्भिक सब कुछ होगा अपना कच्ची धुप में खिलेंगे, खेलेंगे और खिलखिलायेंगे जिन खुशियों के लिए तरसती थी आँखें सब मिल-जुल बढ़ेंगे ऐसा कल हो अपना धर्म-जाति का नाम न लेंगे छोटे-बड़े में द्वेष न होंगे ऐसा देश हो अपना नेता-नीति की बात न होंगी मानव सेवा ही धर्म हो अपना बड़े-बूढ़े मार्गदर्शक हो अपने हँसता हो बचपन अपना पैसे के मोल न होंगे स्नेह-भाव हो पथिक अपना 'आसरा' की सोच है ऐसी सुन्दर सजता सपना तिरंगे के रंगो में देखा है -एक सपना

हिन्दुस्तान की बेटियाँ

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आज सुबह के अनुभव को आप सबके साथ साझा कर रहा हूँ. दिल्ली मेट्रो ट्रेन में सुबह एक छोटे सुखद परिवार से आखें चार हुई. मन ही मन में बहुत सारी बातें भी हुई. इस परिवार के सदस्य थे - दो बेटियाँ और एक माँ ! एक छोटी बेटी जो अपने माँ के गोद में साड़ी के आंचल से ढंकी हुई थी और दूसरी बेटी कुछ ६-७ वर्ष की, एक ढोलक और एक लोहे के छल्ले के साथ खड़ी थी. उस बच्ची के आँख में इतनी चमक थी, जोश था, गजब का आत्मविश्वास था की बता नहीं सकता। चूँकि हम सभी खड़े थे और मेट्रो की रफ़्तार कुछ ज्यादा थी जिससे वह छोटी बच्ची कभी अपने माँ को डगमगाने से बचाती थी तो कभी अपनी रोती हुई छोटी बहन को चुप कराने में व्यस्त थी. वह अपने कुर्ता की जेब से ग्लूकोस बिस्कुट निकाल कर अपनी माँ को भी खिला रही थी और साथ में अपनी छोटी बहन को भी. नियति के इस रीत को देख कर मैं गद-गद हो रहा था. वाह रे हिन्दुस्तान की बेटियाँ तुम पर नाज़ है. जीवन ज्ञापन करने की कला सीखने के लिए हमें स्कूल, कॉलेज और बड़े बड़े यूनिवर्सिटी जाने की जरुरत नहीं, हमारा तो ज्ञानशाला हमारे बीच में ही उपलब्ध है सिर्फ आँखें खुली रखने की जरुरत है. जी हाँ, यह परिवार नित्य दि...

नए साल के ग्रीटिंग्स कार्ड्स

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वह छूकर देखने और महसूस करने का आलम भी बड़ा रोचक होता था. जी हाँ, गुलाब और कई तरह के फूलों वालो से सुसज्जित नए साल के ग्रीटिंग्स कार्ड्स की बात कर रहा हूँ. हम लोगों का नव वर्ष मनाने का तरीका शायद सब का एक जैसा ही था. दिसंबर महीने के आखिरी दो हफ्तों में तरह तरह के रंग बिरंगे सीन-सीनेरियों वाले, दिल वाले, कबूतर और शांति के प्रतीक वाले, कुछ हाथ से बने सीसन्स कार्ड्स को खरीदने और डाक द्वारा भेजने में व्यस्त रहते थे. बड़े ही प्यार और स्नेह से रंग बिरंगी स्केच पेंस से कार्ड्स में सन् देश लिखा जाता था. बहुत लोग अपनी रचित कविता, गीत या शायरी भी लिख डालते थे. लिफ़ाफ़ा को कैमल ब्रांड के गोंद से चिपका या फिर पोस्ट ऑफिस के हलके नीले या हरे रंग के लई से चिपका, उसके ऊपर डाक टिकत को जीभ से गीला कर दे फटा-फट.… अब अंतिम काम सब लिफ़ाफ़े को अलग अलग पोस्ट बॉक्स में डाल नए साल की शुरुआत होती थी. पुरे साल में सबसे ज्यादा अगर कोई प्रिय लगता था तो वो थे डाकिया बाबु। अपनी साईकल की घंटी बजाई नहीं की सब के सब दरवाजे के बाहर। अरे ये ग्रीटिंग कार्ड मेरे होगा, अरे नहीं हटो ये मेरा है.… बस सब के मन में ख़ुशी की लहर. कुछ...

ज़िन्दगी और मूँगफ़ली

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हमारी ज़िन्दगी और मूँगफ़ली में बहुत समानता है. मूँगफ़लीवाला अपने मूँगफ़ली को खूब अच्छी तरह से भुनता है. मूँगफ़ली करारी हो और सारे दाने अच्छे से भुन जाए इसके लिए अपना पूर्ण प्रयास करता है. अब, जब आप मूँगफ़ली को तोड़कर खाते हैं तो उसमे से ज्यादातर द ाने अच्छे और करारे होते हैं परन्तु कुछ-एक दाने कच्चे या फिर ज्यादा जले होते हैं. जबकि मूँगफ़ली बेचने वाला अपने समर्पित भाव से कर्म करता है. हमारा जीवन भी ठीक उसी प्रकार से है. हम अपने बच्चो को सही दिशा और दशा निर्देशित करते हैं. अपने कर्म को प्रधान बनाते हुए सकारात्मक शैली से उनके नियति का लेख लिखने की कोशिश करते हैं. फलस्वरूप हमारे बच्चे समाज के सच्चे मार्गदर्शक बनते हैं. परन्तु कुछ-एक कर्म और दायित्व के सन्मार्ग से विचलित हो असामाजिक तत्त्व के अधीन हो जाते हैं. जबकि आपने अपना सम्पूर्ण दिया है. जीवन जीने की कला सीखना बहुत जरूरी है और यह सिर्फ धन से प्राप्त नहीं हो सकता, यह मेरा मानना है. अतः फुर्सत के चंद लम्हे निकाल कर नमक और मिर्ची के साथ मूँगफ़ली खायें और जीवन का आनंद उठायें।

सैलाँ बनाम सैलून

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जी हाँ, आज कल हमारे यहाँ दो तरह का हेयर कटिंग सैलून पाया जाता है। सबसे पहले आपको सैलाँ से रू-ब-रू करवाते हैं। जाहिर है, जो महानगर में रहते हैं, उन्‍हें ज्‍यादातर इसी ‘यूनीसेक्‍स सैलाँ’ से पाला पड़ता होगा। वेल डि‍सिप्लिन्‍ड वाले सैलाँ में घुसते ही आपका स्‍वागत एक मुस्‍कुराती हुई सुन्‍दर कन्‍या द्वारा किया जाता है। अपनी प्‍लास्टिक स्‍माईल को बरकरार रखते हुए, आपसे बहुत सारे मल्‍टीपल च्‍वाईस प्रश्‍न पूछती है – जैसे कौन-सा हेयर स्‍टाईल रखेंगे – स्‍पाईक, स्‍ट्रेट, आर्मी कट – और उसके बाद हॉलीवुड और बॉलीवुड हीरो-हिरोइन के स्‍टाईल भी। अभी आप इस मंझधार से उबरे भी नहीं कि शेव कौन-सा कराएंगे वगैरह-वगैरह। थैंक गॉड, ये सारे ऑप्‍शन्‍स के लिए आप जवाब दे पाते हैं कि क्‍योंकि आपकी जेब के वॉलेट मोटी और गरम है। क...